Breaking News

सबरंग: नसीब में जिसके जो लिखा था….

‘बाबुल की दुआएं लेती जा...’ और ‘डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली...’ जैसे विदाई गीत हों, ‘तुझको पुकारे मेरा प्यार...’ और ‘तुम अगर साथ देने का वादा करो...’ जैसे प्रेमगीत हों, ‘चंदा मामा दूर के...’ और ‘टिम टिम करते तारे...’ जैसी लोरियां हों, ‘दिल के अरमां आंसुओं में बह गए...’, ‘चेहरा छुपा लिया है किसी ने ...’ जैसी गजलें हों... ‘बड़ी देर भई नंदलाला...’ या ‘तोरा मन दर्पण कहलाए...’ जैसे भजन हों रवि के संगीत में न सिर्फ विविधता मिलती है बल्कि सुरीलापन भी। गिने-चुने वाद्य यंत्रों से मधुर धुनें बनाने के लिए मशहूर रहे संगीतकार रवि की कल आठवीं पुण्यतिथि है।

from Jansattaमनोरंजन – Jansatta https://ift.tt/2vxZDXu

No comments